कुल्ली से अंडरवर्ल्ड डॉन तक !
उसे मसीहा मानते थे तमिल लोग
वरदराजन मुदालियर 1926 में मद्रास प्रेसीडेन्सी थूटुकुडी में पैदा हुआ था और जल्द से जल्द अमीर बनना चाहता था। छोटी-मोटी नौकरी करने के बाद वह 1960 के दशक में 34 साल की उम्र में वह मुंबई चला आया और वीटी स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया। वहीं वो अवैध शराब के कारोबार से जुड़ा। उन दिनों मुंबई में हाजी मस्तान और करीम लाला का राज चलता था। वरदराजन तब गुर्गा था। लेकिन कुछ ही समय बाद उसने खुद का धंधा शुरू कर दिया। वरदराजन कारोबार बढ़ाना चाहता था, जिसके लिए वो हाजी मस्तान से मिला। हाजी वरदराजन से प्रभावित हुआ और दोनों साथ आ गए। इसी दौरान हाजी मस्तान ने उसे करीम लाला से भी मिलवा दिया। कुछ ही सालों में वह मुंबई में स्थापित हो गया। हत्या की सुपारी लेने से लेकर जमीन खाली कराने और ड्रग्स की तस्करी करने जैसे मामलों में मुदालियर शामिल था।
हाजी मस्तान ने पूर्व और उत्तरी मध्य मुंबई की जिम्मेदारी वरदराजन मुदालियर को दे दी। जबकि दक्षिण और मध्य मुंबई का सारा काम करीम लाला संभालने लगा। मुंबई में रहने वाले तमिल समुदाय के लोग उसे मसीहा मानते थे। वह भी अपने लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित था। सब इनके हिसाब से चल रहा था लेकिन अस्सी के दशक में एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के कारण वह मुंबई छोड़कर वापस चेन्नई चला गया। 2 जनवरी 1988 को चेन्नई में माफिया वरदराजन मुदालियर की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
Discussion 0 Comments
No comments yet. Be the first to share your thoughts!
Join the Conversation