कहानी  दिल्ली  के   तंदूर  काण्ड  की !
राजनीति के शैतान !

कहानी दिल्ली के तंदूर काण्ड की !

तंदूर में भून दी गई नैना

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Admin ksbist1966
July 20, 2026 · 1 min read

बात ऐसे कांग्रेसी नेता की, जिसने अपनी प्रेमिका को जिन्दा जला दिया था...

3 जुलाई, 1995 को रात...एक बज चुके थे...दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मैक्सवेल परेरा के फ़ोन की घंटी बजी...दूसरे छोर पर उप पुलिस आयुक्त आदित्य आर्य थे। उन्होंने पहले तो देर रात फ़ोन करने के लिए माफ़ी मांगी और फिर बताया कि लुटियंस के जनपथ इलाके में एक तंदूर में एक महिला का शव को जलाने की कोशिश की गई है। परेरा को माजरा समझने में कुछ समय लगा। उन्होंने आर्य पर सवालों की बौछार कर दी, 'क्या? आप होश में तो हैं? किसका शव? कहाँ ? आप कहाँ हैं इस समय?'

आर्य ने जवाब दिया, "मैं इस समय अशोक यात्री निवास होटल में हूं। यहां पर एक रेस्तरां है बगिया। यह होटल के मुख्य भवन में न हो कर बगीचे में है। मैं वहीं से बोल रहा हूँ। मैक्सवेल परेरा तत्काल अशोक यात्री निवास पहुंचे। एक महिला की अधजली लाश बगिया रेस्टोरेंट किचन के फ़र्श पर पड़ी हुई थी। उसको एक कपड़े से ढका गया था। रेस्तरां के मैनेजर केशव कुमार को पुलिसवालों ने पकड़ रखा था। महिला के शरीर का मुख्य हिस्सा जल चुका था। आग जूड़े को पूरी तरह से नहीं जला पाई थी। आग की गर्मी से महिला की अतड़ियां पेट फाड़ कर बाहर आ गई थीं। अगर लाश आधे घंटे और जलती तो कुछ भी शेष नहीं रहता। रेस्तरां के मैनेजर से पूछताछ में पता चल गया था कि लाश कांग्रेस की महिला नेता नैना साहनी की है। जलानेवाला भी कांग्रेस नेता सुशील शर्मा है...दिल्ली युवक कांग्रेस का अध्यक्षन


ऐसे हुआ खुलासा

उस रात 11 बजे दिल्ली पुलिस के दो सिपाही अब्दुल नज़ीर कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल जनपथ पर गश्त लगा रहे थे। वो ग़लती से अपना वायरलेस सेट पुलिस चौकी पर ही छोड़ आए थे। उन्हें अशोक यात्री निवास के अंदर से आग की लपटें और धुआं उठता दिखाई दिया।

आग देख कर जब वो दोनों बगिया रेस्तराँ के गेट पर पहुंचे। देखा कि कांग्रेस नेता सुशील शर्मा वहां खड़ा था। उसने गेट को कनात से घेर रखा था। जब कुंजू ने आग की वजह पूछी, तो रेस्तरां के मैनेजर केशव ने जवाब दिया कि वो लोग पार्टी के पुराने पोस्टर जला रहे थे। अब्दुल नज़ीर कुंजू और चंदर पाल आगे चले गए। लेकिन उन्हें लगने लगा कि कुछ गड़बड़ ज़रूर है। दोनों बगिया रेस्तरां के पीछे और सात-आठ फ़िट की दीवार फलांग कर अंदर कूदे। केशव ने फिर रोकने की कोशिश की। लेकिन दोनों नहीं माने। जब दोनों तंदूर के नज़दीक गए तो देखा कि वहां एक लाश जल रही थी। केशव ने कहा कि वो बकरे को भून रहा है। जब कुंजू ने उसे बल्ली से हिलाया, तो पता चल गया कि वो बकरा नहीं, एक महिला की लाश थी। कुंजू ने तुरंत रेस्तरां से फोन कर एसएचओ को सूचना दी। इसके बाद तमाम पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुशील शर्मा मौके से जा चुका था। लेकिन रेस्तरां का मैनेजर केशव नहीं भाग पाया। ये रेस्तरां सुशील शर्मा ही लीज पर चला रहा था और जिस महिला की लाश को तंदूर में भूनने की कोशिश की गई, वो शर्मा की 'लिव इन पार्टनर' और दिल्ली यूथ कांग्रेस के गर्ल्स विंग की जनरल सेक्रेटरी नैना साहनी थी।


लव ट्राएंगल के शक में उतारा मौत के घाट !

सुशील शर्मा और नैना साहनी दोनों मंदिर मार्ग के फ़्लैट-8-A में मियां-बीबी की तरह रहते थे। लेकिन उन्होंने उस शादी को सबके लिए सामाजिक तौर पर उजागर नहीं किया था। नैना सुशील पर लगातार दबाव बना रही थी कि वो इस शादी को उजागर करे। इस बात से दोनों में मनमुटाव शुरू हो गए। ये बात भी सामने आई कि नैना ने सुशील की आदतों और अत्याचारों से तंग आकर अपने पुराने मित्र मतलूब करीम से मदद की गुहार की। वो ऑस्ट्रेलिया जाना चाहती थी। मतलूब करीम उसके ऑस्ट्रेलिया जाने का इंतजाम कर रहा था। सुशील शर्मा को नैना साहनी पर शक हो गया। वो जब भी घर वापस आता घर के लैंड लाइन फ़ोन को चेक करता था कि उस दिन नैना की किस-किस से बात हुई है. घटना के दिन जब सुशील ने अपने घर पर लगे फ़ोन को री-डायल किया, तो दूसरे छोर पर मतलूब करीम ने फ़ोन उठायाm

इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि नैना अब भी मतलूब के संपर्क में है। सुशील को गुस्सा आ गया और उसने अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से नैना को चार गोलियां मारी। रिवॉल्वर की एक गोली से एसी के फ़्रेम में छेद हो गया। सुशील शर्मा ने अपने फ्लैट में नैना की हत्या करने के बाद पहले बॉडी को पहले पॉलीथिन में लपेटा, फिर चादर में रैप किया। लेकिन वो उसे उठा नहीं पाया, इसलिए उसे ड्रैग करके नीचे खड़ी अपनी मारुति कार तक लाया...उसने उसे कार की डिक्की में तो रख लिया। लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे ठिकाने किस तरह लगाना है. पहले उसने सोचा कि वो लाश को निज़ामुद्दीन ब्रिज के नीचे यमुना नदी में फेंक देगा...लेकिन बाद में उसने ये विचार बदल दिया कि कोई उसे ऐसा करते हुए देख न ले। उसे ख़्याल आया कि वो अपने ही रेस्तरां में लाश को जला कर सारे सबूत नष्ट कर दे। उसने सोचा कि उसे ऐसा करते हुए कोई देखेगा नहीं और डेड बॉडी को ठिकाने लगा दिया जाएगा। लेकिन सिपाही अब्दुल नज़ीर कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल ने उसके किए-कराए पर पानी फेर दिया।


कत्ल के बाद गुजरात भवन में गुजारी रात

पुलिस सुशील शर्मा की तलाश में जुटी थी और वो गुजरात भवन में सो रहा था। नैना की हत्या करने के बाद उसने गुजरात भवन में गुजरात काडर के एक आईएएस अधिकारी डीके राव के साथ रात बिताई। रेस्तरां के मैनेजर केशव से पुलिस को जानकारी मिल गई थी कि दिन में सुशील के दोस्त डीके राव उनसे मिलने आए थे और वो गुजरात भवन में ठहरे है। पुलिस गुजरात भवन गई, तो वहां के कर्मचारियों ने इस बात की पुष्टि की कि राव कमरा नंबर-20 में ठहरे हुए थे। उनके साथ एक गेस्ट भी थे।

राव की सुबह पांच बजे फ़्लाइट थी। वो कमरा छोड़ कर चले गए। कुछ देर बाद उनका गेस्ट भी चला गया है। डीके राव से फ़ोन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि .सुशील शर्मा रात में उनके ही पास था। उन्होंने ये भी बताया कि वो बहुत परेशान था।


अग्रिम ज़मानत लेने में सफल रहा सुशील

अगले दिन सुशील शर्मा पहले टैक्सी से जयपुर गया और फिर वहां से चेन्नई होते हुए बेंगलुरु पहुंचा। सुशील ने चेन्नई में अपने संपर्कों के ज़रिए एक वकील अनंत नारायण से संपर्क किया और अग्रिम ज़मानत के लिए अदालत में अर्ज़ी लगा दीं। इसके बाद वो अपना चेहरा बदलने के लिए तिरुपति चला गया और वहां पर अपने बाल कटवाने के बाद वापस चेन्नई आ गया। जब तक इस हत्या के बारे में पूरे भारत में हल्ला मच चुका था। लेकिन इसके बावजूद चेन्नई के जज ने उसे अग्रिम ज़मानत दे दी.हालांकि दिल्ली पुलिस सुशील की कस्टडी में ले आई।


केशव पर दबाव की कोशिश (

इस पूरे मामले में बगिया रेस्तरां का मैनेजर केशव कुमार ही वारदात का प्रत्यक्षदर्शी था। लेकिन वो सुशील शर्मा के साथ खड़ा नज़र आया। उसने पहले तो अप्रूवर बनने से ये कहते हुए इंकार कर दिया कि सुशील के उस पर बहुत एहसान हैं। बाद में जब वो अप्रूवर बनने के लिए तेयार भी हुआ तो सुशील शर्मा उस पर ऐसा न करने के लिए दबाव बनाने लगा। केशव और सुशील दोनों ही तिहाड़ जेल में बंद थे। पहले तो केशव सुशील शर्मा के लिए बहुत वफ़ादार था। लेकिन धीरे-धीरे जब उसने अप्रूवर बनने का मन बना लिया और सुशील को इस बात की ख़बर लगी, जब सुशील ने केशव को तिहाड़ जेल के अंदर ही डराना धमकाना शुरू कर दिया। उसे जेल में ही कोई नशीली दवाई दे दी गई। वो दो दिन तक नींद से ही नहीं उठा, तब जेल वॉर्डन को पता चला कि उसने डेढ़-दो दिनों से खाना भी नहीं खाया है। उसी दिन केशव को उस वॉर्ड से हटा कर दूसरे वॉर्ड में भेज दिया गया।


गृह सचिव ने किया मौके का मुआयना

ये केस कितना हाई प्रोफाइल था, इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि तत्कालीन केन्द्रीय गृह सचिव पद्मनाभैया खुद सुशील शर्मा और नैना साहनी के मंदिर मार्ग वाले फ़्लैट का मुआयना करने पहुंचे। आरोप तो यहां तक है कि सुशील शर्मा को बचाने के लिए मैक्सवेल परेरा पर दबाव डाला गया और जब वो नहीं माने तो उनके ऊपर इंटेलिजेंस ब्यूरो से की जांच बैठा दी गई। लेकिन परेरा झुके नहीं। उन्होंने पहली बार केस सुलझाने के लिए डीएनए और स्कल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल गया। साबित कर दिया कि नैना साहनी का डीएनए उनके माता-पिता के अलावा किसी और का नहीं हो सकता...उन्होंने 'स्कल सुपर-इंपोज़ीशन' टेस्ट भी कराया, जिससे ये साबित हो गया कि ये नैना साहनी का ही शव है। सब कुछ करने के बाद पुलिस ने सिर्फ़ 26 दिनों के अंदर अदालत में चार्ज शीट दायर की। घटना के समय मनिंदरजीत सिंह बिट्टा अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। सुशील शर्मा दिल्ली विंग का अध्यक्ष होने के नाते संगठनात्मक तौर पर उनके ठीक नीचे काम करता था... सुशील शर्मा ने इस पूरे मामले को मनिंदरजीत सिंह बिट्टा की रची गई एक 'राजनीतिक साजिश' करार दिया। लेकिन उसकी ये चाल काम न आई..सालों तक चले मुकदमें में सुशील शर्मा को निचली अदालत ने फांसी की सज़ा सुनाई। हाई कोर्ट ने भी ये सज़ा बरकरार रखी। बाद में 8 अक्तूबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने इस सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया...22 दिसंबर, 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुशील शर्मा को ये कहते हुए रिहा कर दिया कि उसके माता-पिता की देखभाल करनेवाला कोई नहीं है। दरअलल ऐसी स्थिति थी भी. पिता: सुशील शर्मा के पिता एक सरकारी कर्मचारी थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी और बचत सुशील शर्मा के अदालती मुकदमों और वकीलों की फीस चुकाने में खर्च कर दी थी। सुशील शर्मा के माता-पिता बेहद सीधे और सम्मानित नागरिक थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी उनकी वृद्धावस्था और लाचारी को रिहाई की दलील का आधार बनाया गया। सुशील शर्मा का एक छोटा भाई था। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र था। 1978 में एक सड़क दुर्घटना में उसके इस छोटे भाई की असमय मौत हो गई थी। भाई की मौत के बाद सुशील ही अपने माता-पिता की इकलौती संतान और बुढ़ापे का एकमात्र सहारा बचा था, वहीं बात नैना शर्मा की करें तो दिल्ली यूथ कांग्रेस की गर्ल्स विंग की जनरल सेक्रेटरी के पद पर काम करते सुशील के संपर्क में आई। नैना साहनी के पिता हरभजन सिंह ऑर्डनेंस फैक्ट्री में स्टोरकीपर के थे। मां जसवंत कौर साधारण गृहिणी थीं। हरभजन सिंह और जसवंत कौर के कुल चार बच्चे थे। नैना पढ़ाई-लिखाई में काफी अच्छी थीं। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया था। नैना साहनी बेहद महत्वाकांक्षी थीं। राजनीति में आने से पहले उनका सपना एक कमर्शियल पायलट बनने का था। इसके लिए उसने बकायदा ट्रेनिंग और तैयारी भी शुरू कर दी थी। लेकिन वो सुशील के चक्कर में फंस कर तंदूर में पहुंच गई।

सुशील राजीव का खास हुआ करता था। उसे कांग्रेस चाकूबाज कहा जाता था। क्योंकि वो चाकू स्व विपक्षी पार्टियों के पोस्टर बैनर फाड़ता था।

. कमलेश चौबे




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