अतीक से खतरनाक था चांद !
राजनीति के शैतान !

अतीक से खतरनाक था चांद !

इलाहाबाद का शातिर बदमाश !

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Admin ksbist1966
July 18, 2026 · 1 min read

अतीक अहमद नहीं रहा लेकिन उसकी दबंगई के चर्चे आज भी होते हैं लेकिन क्या आपको पता है एक दौर में इलाहाबाद में अतीक अहमद से भी बड़ा एक गुंडा हुआ करता था..अतीक अहमद ने भी बदमाशी की एबीसीडी उसी से सीखी...हम बात कर रहे चांद बाबा की...

 शौक इलाही उर्फ चांद हड्डी। इलाहाबाद के गढ़ी सराय का शातिर बदमाश था जो बाद में चांदबाबा हो गया ...उसके चांद बाबा बनने की कहानी भी अजब .. गढ़ी सराय की हमाम गली में झाड़ फूंक करने वाला एक बाबा था.. चांद हड्डी को शक था कि उसके बड़े भाई रहमत की मौत बाबा के झाड़ फूंक की वजह से हुई है. उसने उस बाबा की हत्या कर दी...इस घटना से चांद हड्डी, चांद बाबा बन गया..झाड़ फूंक करने वाले बाबा की हत्या के आरोप में चांद बाबा के खिलाफ शाहगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई और वो नैनी जेल भेज दिया गया..जेल से जमानत पर छूटते ही चांद बाबा ने अपने बड़े भाई रहमत के करीबी दोस्त को भी गोलियों से भून दिया ..उसे शक था कि यह खास दोस्त भी रहमत की मौत का ज़िम्मेदार है. चांद बाबा ने तीसरी हत्या अपने वकील की ही कर दी, किसी बात पर बहस के बाद उसने वकील का सीना पहले गोलियों से छलनी किया, फिर बम मार कर उसके शव को चिथड़े -चिथड़े कर दिया. चांद बाबा के खिलाफ मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती चली गई.. पुलिस पीछे पड़ी तो उसने सरेंडर कर दिया. उसे फिर नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया. नैनी सेंट्रल जेल में एक मांग ना मांगे जाने पर उसने जेल में रहते हुए अपने साथी जग्गा से नैनी सेंट्रल जेल के जेलर पर बमों से हमला करवा दिया‌. कुछ दिनों के बाद चांद बाबा ज़मानत पर बाहर आ गया...वो अपने गैंग का विस्तार करने लगा. उसके गैंग में 100 से 150 शातिर अपराधी और बमबाज शामिल हो गए. और यह गैंग इलाहाबाद के तमाम मुहल्लों तक फैल गई ..अतीक अहमद भी इन बदमाशों में एक था...उस समय गढ़ी सराय में चकलाघर चलते थे. इसके संचालक अच्छे’ और भाई ‘लड्डन.’ नाम के दो सगे भाई थे.. ये भी छंटे बदमाश थे...मुहल्ले वालों के कहने पर चांद बाबा ने मोर्चा संभाला .. चाँद बाबा की अच्छे ऐंड ब्रदर्स के साथ भयंकर बमबाजी हुई. ..अंत में चांद बाबा ने वेश्याओं के घरों पर बम मार-मार कर उन्हें मीरगंज भगा दिया. इससे चांद बाबा का प्रभाव और बढ़ गया. चांद बाबा का नाम शहर की हर अपराधिक घटना में आने लगा..पुलिस तथा प्रशासन की नाक में चांद बाबा ने दम कर दिया.

पुलिस ने चांद बाबा को पकड़ने का प्रयास शुरू किया. तेजतर्रार कोतवाल नवरंग सिंह ने 1986 में एक दिन सारे थानों की पुलिस बुलाकर घेराबंदी की.... लेकिन चांद बाबा और उसके गैंग के सदस्य बमबाजी करते हुए पुलिस को चकमा देकर भाग निकले...इससे गुस्से में आए चांद बाबा ने अगले ही दिन अपने गैंग के साथ कोतवाली पर ही धावा बोल दिया ..उसकी गैंग ने इतने बम बरसाए कि कोतवाली दहल गयी. पुलिस ने किसी तरह कोतवाली का गेट बंद करके अपनी जान बचाई

.कोतवाली पर आक्रमण से गुस्से में आई पुलिस और चांद बाबा के बीच चूहे बिल्ली का खेल शुरू हो गया. पुलिस ने चांद बाबा के घर के पास हम्माम गली में ही एक पुलिस चौकी स्थापित की, जिसे कुछ ही दिनों में चांद बाबा और उसके गैंग ने बमों से उड़ा दिया. पुलिस ने इसे अपने मान- सम्मान से जोड़ लिया और ताबड़तोड़ छापेमारी करने लगी.तब उत्तरी विधानसभा के तत्कालीन कांग्रेस विधायक ने चांद बाबा को अपने पास बुलाया और उसे सरेंडर करने की सलाह दी. चांद बाबा सरेंडर करके जेल चला गया..जेल से ही 1989 के सभासद के चुनाव में चांद बाबा ने नामांकन भर दिया और जीत दर्ज की. कुछ ही दिनों बाद चांद बाबा को सशर्त जमानत मिल गई . नैनी जेल से चांद बाबा को लेने शहर से भारी हुजूम उमड़ पड़ा. अतीक अहमद खुद खुली जीप में चांद बाबा को नैनी जेल से जुलूस के साथ लेकर शहर आया..अतीक अहमद और चांद बाबा इलाहाबाद में चर्चित हो चुके थे 


इनका आंतक इस कदर था कि इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से महज 2 किमी दूर ही मुस्लिम बहुल इलाके में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की कालोनी है, ‘करैली’ गुरु तेग बहादुर नगर... इन्होंने सिखों और हिंदुओं को इस कॉलोनी से खदेड़ दिया...दरअसल .इस कालोनी के बीच में वक्फ़ बोर्ड का एक बहुत पुराना कब्रिस्तान है, जिसमें मौजूद मस्जिद के इक्सटेंशन को लेकर अक्सर शहर का माहौल खराब होता था.सरकार का कहना था कि आवास विकास परिषद की कालोनी में कानूनन सार्वजनिक धार्मिक स्थल प्रतिबंधित है तो मुस्लिम कहते कि यह ज़मीन वक्फ़ बोर्ड की है इसलिए हम इस पर कुछ भी निर्माण कर सकते हैं.कालोनी 99 फीसदी मुस्लिम मुहल्लों के बीच थी.. धीरे-धीरे हिंदू और सिख अपना मकान बेच कर यहां से जाने लगे. 1984 के सिख विरोधी दंगों‌ ने सिखों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया..एक दिन शौक इलाही उर्फ चांद बाबा ने ऐलान किया कि शहर से करैली को जोड़ने वाली नूरुल्लाह रोड को ब्लाक करके 24 घंटे के अंदर मस्जिद के निर्माण को पूरा किया जाएगा, जो भी इसके बीच में आएगा बम से मारा जाएगा.पूरे शहर में भारी सांप्रदायिक तनाव और डर फैल गया.चांद बाबा के गैंग ने नूरूल्लाह रोड को 24 घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया और लगातार बम बरसाती रही..... इस दौरान मस्जिद में नवनिर्माण करा दिए गए..इस घटना से करैली से गैरमुस्लिमों का पलायन‌ शुरू होने लगा, यह सभी लोग मुसलमानों को औने-पौने दामों में अपने मकान और जमीन बेचकर जाने लगे. उलट खोपड़ी और सनकी ‘चांद बाबा’ क्या ऐलान कर दे, कोई भरोसा नहीं था

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 डर के इसी माहौल में 1989 का विधान सभा चुनाव आ गया..चांद बाबा को शुरूआती दौर में संरक्षण देने वाले एक कांग्रेस नेता अशोक कुमार बाजपेयी ने चांद बाबा के ही गुर्गे अतीक अहमद को तैयार कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उसका नामांकन करा दिया..अतीक अहमद को नामांकन करता देख आगबबूला ‘चांद बाबा’ ने भी ऐलान कर दिया कि वह भी विधायक का निर्दलीय उम्मीदवार होगा और अगले दिन ही उसने भी नामांकन कर दिया...अतीक अहमद ने चांद बाबा को समझाने की कोशिश की, कि मुस्लिम वोट बंट जाएंगे, तो चांद बाबा गालियां देते हुए कहता कि ‘ठीक है तुम नामांकन वापस ले लो, विधायक मैं बनूंगा. तुम जाहिल अनपढ़ विधायक बन कर क्या करोगे ?’इसके बाद अतीक अहमद और चांद बाबा के संबंध खराब हो गये और दोनों विधानसभा के चुनाव में आमने-सामने थे.

चुनाव प्रचार में अतीक अहमद नियंत्रित रहता तो चांद बाबा बेहद आक्रामक....चांद बाबा बाबा अतीक अहमद को गालियां देता, अनपढ़ गंवार कह कर मज़ाक उड़ाता और इसी सबके बीच दोनों की दुश्मनी बढ़ती गयी.अतीक अहमद के समर्थन में चांद बाबा से पीड़ित लोग आने लगे. फिर आ गया मतदान का दिन 22 नवंबर 1989....उस दिन ‘चांद बाबा’ पर सनक सवार थी. हर पोलिंग बूथ पर चांद बाबा जाकर गाली गलौज करता और दोपहर बाद वह पश्चिमी विधानसभा की सबसे बड़े पोलिंग ‘अटाला’ के मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज पहुंच गया..उसे किसी ने बताया कि यहां पर अतीक अहमद के समर्थन में फर्जी वोटिंग हो रही है,..उसने पुलिस के एक अफसर के साथ बत्तमीज़ी और गाली गलौज कर दी... इसके बाद उसकी नज़र घोड़े पर बैठे अतीक अहमद के पिता फिरोज़ अहमद पर पड़ी तो उसने उन्हें भी गंदी-गंदी गालियां दी..घोड़े से नीचे उतार कर दाढ़ी नोंच ली और ऊपर थूक दिया

.यह खबर फैलते ही शहर पश्चिमी में एक सनसनी फैल गई..अतीक और चांद बाबा के बीच गैंगवॉर लोग तय मानने लगे..हुआ भी यही रात नौ बजे के लगभग अतीक अहमद अपने समर्थकों के साथ रोशन बाग ढाल स्थित कवाब पराठे की एक मशहूर दुकान ‘जब्बार होटल में खाना खा रहा था.. चांद बाबा को आरिफ नाम के एक शख्स ने ये खबर पहुंचा दी ...चांद बाबा अपनी गैंग के साथ अतीक अहमद को मारने जब्बार होटल पहुंच गया..वो कुछ कर पाता कि इससे पहले ही बिजली चली गई ,,चारों ओर धुप अंधेरा छा गया...रेस्टोरेंट से लगी सभी सड़कें ब्लाक कर दी गयीं. चांद बाबा चारों तरफ से घिर गया था. उसके गैंग के लोग मामले को समझ कर भाग खड़े हुए ...अकेले चांद बाबा गालियां बकते बम पटकता रहा. उसके सबसे विश्वसनीय जग्गा और छम्मन भी भाग निकले,,रेस्टोरेंट के आसपास बमबाजी होती रही ...फिर रात करीब 10 बजे खबर आई कि चांद बाबा की हत्या हो गयी.पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चांद बाबा के शव में सीक कवाब की गरमागरम नुकीली रॉड से 12 सुराख होने की बात कही गई. कहते हैं यह अतीक अहमद ने अपने हाथों से किया, लेकिन अतीक अहमद पर चांद बाबा की हत्या का कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, पुलिस ने अज्ञात लोगों का हाथ इसमें बता दिया ...अगले ही दिन विधानसभा चुनाव का परिणाम आया और अतीक अहमद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विजयी घोषित हुए. चांद बाबा चौथे स्थान पर रहा...


. कमलेश चौबे



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